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महाभारत 150.3

यदा त्वस्य भवेद्बुद्धिर्धर्म्या चार्थप्रदर्शिनी
तदाश्वसीत धर्मात्मादृढबुद्धिर्न विश्वसेत्

पूरा अध्याय