Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 144.34

न तेऽपराधमिह वै दृष्टवानस्मि सुव्रत
प्रीतोऽस्मि तव गोविन्द वृणु कामान्यथेप्सितान्
प्रसन्नस्य च मे तात पश्य व्युष्टिर्यथाविधा

पूरा अध्याय