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महाभारत 144.21

ततोऽहं ज्वलमानं वै पायसं प्रत्यवेदयम्
तद्भुक्त्वैव तु स क्षिप्रं ततो वचनमब्रवीत्
क्षिप्रमङ्गानि लिम्पस्व पायसेनेति स स्म ह

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