ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 1414.98महाभारत 14.98दिवसकरशशाङ्कवह्निदीप्तं; त्रिभुवनसारमपारमाद्यमेकम् अजरममरमप्रसाद्य रुद्रं; जगति पुमानिह को लभेत शान्तिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय