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महाभारत 135.77

अनिवर्ती निवृत्तात्मा संक्षेप्ता क्षेमकृच्छिवः
श्रीवत्सवक्षाः श्रीवासः श्रीपतिः श्रीमतां वरः

पूरा अध्याय