ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 134134.50महाभारत 134.50पुण्यमेतत्तपश्चैव स्वर्गश्चैष सनातनः या नारी भर्तृपरमा भवेद्भर्तृव्रता शिवापिछलाअगलापूरा अध्याय