ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 134134.33महाभारत 134.33सुस्वभावा सुवचना सुवृत्ता सुखदर्शना अनन्यचित्ता सुमुखी भर्तुः सा धर्मचारिणीपिछलाअगलापूरा अध्याय