ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 133133.34महाभारत 133.34उपक्रामति जन्तूंश्च उद्वेगजननः सदा एवंशीलसमाचारो निरयं प्रतिपद्यतेपिछलाअगलापूरा अध्याय