ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 133133.31महाभारत 133.31उदात्तकुलजातीय उदात्ताभिजनः सदा एष धर्मो मया प्रोक्तो विधात्रा स्वयमीरितःपिछलाअगलापूरा अध्याय