ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 127127.31महाभारत 127.31ततो गिरिसुता दृष्ट्वा दीप्ताग्निसदृशेक्षणम् हरं प्रणम्य शिरसा ददर्शायतलोचनापिछलाअगलापूरा अध्याय