ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 121121.15महाभारत 121.15यानीमान्युत्तमानीह वेदोक्तानि प्रशंससि तेषां श्रेष्ठतमं दानमिति मे नास्ति संशयःपिछलाअगलापूरा अध्याय