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महाभारत 120.11

कीट उवाच
सुखात्सुखतरं प्राप्तो भगवंस्त्वत्कृते ह्यहम्
धर्ममूलां श्रियं प्राप्य पाप्मा नष्ट इहाद्य मे

पूरा अध्याय