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महाभारत 118.1

युधिष्ठिर उवाच
अकामाश्च सकामाश्च हता येऽस्मिन्महाहवे
कां योनिं प्रतिपन्नास्ते तन्मे ब्रूहि पितामह

पूरा अध्याय