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महाभारत 112.25

बृहस्पतिरुवाच
अन्नमश्नन्ति ये देवाः शरीरस्था नरेश्वर
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिर्मनस्तथा

पूरा अध्याय