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महाभारत 11.1

युधिष्ठिर उवाच
कीदृशे पुरुषे तात स्त्रीषु वा भरतर्षभ
श्रीः पद्मा वसते नित्यं तन्मे ब्रूहि पितामह

पूरा अध्याय