Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 106.31

एकादशाहैरयजं सदक्षिणै;र्द्विर्द्वादशाहैरश्वमेधैश्च देव
आर्कायणैः षोडशभिश्च ब्रह्मं;स्तेषां फलेनेह न चागतोऽस्मि

पूरा अध्याय