Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 1.41

सर्प उवाच
यथा हवींषि जुह्वाना मखे वै लुब्धकर्त्विजः
न फलं प्राप्नुवन्त्यत्र परलोके तथा ह्यहम्

पूरा अध्याय