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महाभारत 91.28

निगृहीतादमात्याच्च स्त्रीभ्यश्चैव विशेषतः
पर्वताद्विषमाद्दुर्गाद्धस्तिनोऽश्वात्सरीसृपात्

पूरा अध्याय