ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 8484.27महाभारत 84.27केवलात्पुनराचारात्कर्मणो नोपपद्यते परिमर्शो विशेषाणामश्रुतस्येह दुर्मतेःपिछलाअगलापूरा अध्याय