ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 7878.22महाभारत 78.22नाब्रह्मचारी भिक्षावान्भिक्षुर्वाब्रह्मचारिकः अनृत्विजं हुतं नास्ति मामकान्तरमाविशःपिछलाअगलापूरा अध्याय