ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 77.36महाभारत 7.36स धनंजय निर्द्वंद्वो मुनिर्ज्ञानसमन्वितः वनमामन्त्र्य वः सर्वान्गमिष्यामि परंतपपिछलाअगलापूरा अध्याय