ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 5959.99महाभारत 59.99मृत्योस्तु दुहिता राजन्सुनीथा नाम मानसी प्रख्याता त्रिषु लोकेषु या सा वेनमजीजनत्पिछलाअगलापूरा अध्याय