ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 5757.4महाभारत 57.4तदेतन्नरशार्दूल हृदि त्वं कर्तुमर्हसि संधेयानपि संधत्स्व विरोध्यांश्च विरोधयपिछलाअगलापूरा अध्याय