ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 5656.1महाभारत 56.1वैशंपायन उवाच प्रणिपत्य हृषीकेशमभिवाद्य पितामहम् अनुमान्य गुरून्सर्वान्पर्यपृच्छद्युधिष्ठिरःअगलापूरा अध्याय