ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 4848.14महाभारत 48.14एवं मे छिन्धि वार्ष्णेय संशयं तार्क्ष्यकेतन आगमो हि परः कृष्ण त्वत्तो नो वासवानुजपिछलाअगलापूरा अध्याय