ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 4747.14महाभारत 47.14हरिं सहस्रशिरसं सहस्रचरणेक्षणम् प्राहुर्नारायणं देवं यं विश्वस्य परायणम्पिछलाअगलापूरा अध्याय