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महाभारत 45.3

वैशंपायन उवाच
शृणु राजेन्द्र तत्त्वेन कीर्त्यमानं मयानघ
वासुदेवं पुरस्कृत्य यदकुर्वत पाण्डवाः

पूरा अध्याय