Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 45.17

सुखेन ते निशा कच्चिद्व्युष्टा बुद्धिमतां वर
कच्चिज्ज्ञानानि सर्वाणि प्रसन्नानि तवाच्युत

पूरा अध्याय