ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 347347.15महाभारत 347.15अहं त्वनेन नागेन्द्र सामपूर्वं समाहिता प्रस्थाप्यो मत्सकाशं स संप्राप्तो भुजगोत्तमःपिछलाअगलापूरा अध्याय