ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 336336.69महाभारत 336.69सांख्ययोगेन तुल्यो हि धर्म एकान्तसेवितः नारायणात्मके मोक्षे ततो यान्ति परां गतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय