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महाभारत 330.47

अथ रुद्र उपाधावत्तावृषी तपसान्वितौ
तत एनं समुद्धूतं कण्ठे जग्राह पाणिना
नारायणः स विश्वात्मा तेनास्य शितिकण्ठता

पूरा अध्याय