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महाभारत 330.1

श्रीभगवानुवाच
सूर्याचन्द्रमसौ शश्वत्केशैर्मे अंशुसंज्ञितैः
बोधयंस्तापयंश्चैव जगदुत्तिष्ठतः पृथक्

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