Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 320.18

तं प्रक्रमन्तमाज्ञाय पिता स्नेहसमन्वितः
उत्तमां गतिमास्थाय पृष्ठतोऽनुससार ह

पूरा अध्याय