ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 318318.48महाभारत 318.48ततो मुहूर्तं संचिन्त्य निश्चितां गतिमात्मनः परावरज्ञो धर्मस्य परां नैःश्रेयसीं गतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय