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महाभारत 31.1

वैशंपायन उवाच
ततो राजा पाण्डुसुतो नारदं प्रत्यभाषत
भगवञ्श्रोतुमिच्छामि सुवर्णष्ठीविसंभवम्

पूरा अध्याय