ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 309309.43महाभारत 309.43पुरान्धकारमेककोऽनुपश्यसि त्वरस्व वै पुरा हिरण्मयान्नगान्निरीक्षसेऽद्रिमूर्धनिपिछलाअगलापूरा अध्याय