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महाभारत 309.29

मर्यादा नियताः स्वयंभुवा य इहेमाः; प्रभिनत्ति दशगुणा मनोनुगत्वात्
निवसति भृशमसुखं पितृविषय;विपिनमवगाह्य स पापः

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