Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 305.7

ब्रह्माणमाप्नोति विभुं मूर्ध्ना देवाग्रजं तथा
एतान्युत्क्रमणस्थानान्युक्तानि मिथिलेश्वर

पूरा अध्याय