ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 305305.3महाभारत 305.3पायुनोत्क्रममाणस्तु मैत्रं स्थानमवाप्नुयात् पृथिवीं जघनेनाथ ऊरुभ्यां तु प्रजापतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय