Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 302.14

अग्राह्यावृषिशार्दूल कथमेको ह्यचेतनः
चेतनावांस्तथा चैकः क्षेत्रज्ञ इति भाषितः

पूरा अध्याय