Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 300.5

चतुर्विधं प्रजाजालं निर्दहत्याशु तेजसा
जराय्वण्डस्वेदजातमुद्भिज्जं च नराधिप

पूरा अध्याय