Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 297.21

अधृतात्मन्धृतौ तिष्ठ दुर्बुद्धे बुद्धिमान्भव
अप्रशान्त प्रशाम्य त्वमप्राज्ञ प्राज्ञवच्चर

पूरा अध्याय