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महाभारत 296.14

एतत्तत्तत्त्वमित्याहुर्निस्तत्त्वमजरामरम्
तत्त्वसंश्रयणादेतत्तत्त्ववन्न च मानद
पञ्चविंशतितत्त्वानि प्रवदन्ति मनीषिणः

पूरा अध्याय