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महाभारत 294.1

करालजनक उवाच
नानात्वैकत्वमित्युक्तं त्वयैतदृषिसत्तम
पश्यामि चाभिसंदिग्धमेतयोर्वै निदर्शनम्

पूरा अध्याय