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महाभारत 293.36

पुमांश्चैवापुमांश्चैव त्रैलिङ्ग्यं प्राकृतं स्मृतम्
नैव पुमान्पुमांश्चैव स लिङ्गीत्यभिधीयते

पूरा अध्याय