Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 291.13

वसिष्ठ उवाच
श्रूयतां पृथिवीपाल क्षरतीदं यथा जगत्
यन्न क्षरति पूर्वेण यावत्कालेन चाप्यथ

पूरा अध्याय