Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 282.17

सत्कृत्य तु द्विजातिभ्यो यो ददाति नराधिप
यादृशं तादृशं नित्यमश्नाति फलमूर्जितम्

पूरा अध्याय