ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 277277.13महाभारत 277.13मुक्ता वीतभया लोके चरन्ति सुखिनो नराः सक्तभावा विनश्यन्ति नरास्तत्र न संशयःपिछलाअगलापूरा अध्याय