Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 276.42

आकाशस्था ध्रुवं यत्र दोषं ब्रूयुर्विपश्चिताम्
आत्मपूजाभिकामा वै को वसेत्तत्र पण्डितः

पूरा अध्याय