ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 276276.24महाभारत 276.24कर्मोत्कर्षं न मार्गेत परेषां परिनिन्दया स्वगुणैरेव मार्गेत विप्रकर्षं पृथग्जनात्पिछलाअगलापूरा अध्याय